Thursday, April 2, 2026
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‘भारत को सबसे घातक हथियार क्‍यों दे रहे’, कभी रूस पर भड़का था चीन, अब ‘नो ल‍िम‍िट’ दोस्‍ती, बड़ा खतरा

नई दिल्‍ली: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही चीन और रूस के बीच दोस्‍ती ‘नो ल‍िम‍िट’ वाली हो गई है। एक समय था जब रूस को डर सताता था कि चीन उसके फॉर ईस्‍ट इलाके पर कब्‍जा कर सकता है। ऑस्‍ट्रेलियाई थिंक टैंक ASPI की रिपोर्ट के मुताबिक अब चीन और रूस की जोड़ी वैश्विक व्‍यवस्‍था को आकार दे रही है और यह पश्चिमी देशों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। चीन के पास अत्‍याधुनिक रूसी हथियार तकनीक खुलकर आ रही है जिसका असर भारत की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। एक समय वह भी था जब चीन ने रूस से शिकायत की थी कि वह भारत को अत्‍याधुनिक हथियारों की तकनीक क्‍यों दे रहा है।

ASPI की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस और चीन के बीच दोस्‍ती कोल्‍ड वॉर की समाप्ति के बाद बढ़ना शुरू हो गया था लेकिन हाल के वर्षों में इसमें और भी ज्‍यादा तेजी आई है। रूस और चीन दोनों को अब यह भरोसा हो गया है कि वे मिलकर पश्चिमी देशों को मात दे सकते हैं और उनके साथ प्रतिस्‍पर्धा कर सकते हैं। पश्चिमी देश लगातार रूस के यूक्रेन पर हमले और चीन की हिंद प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ती सैन्‍य आक्रामकता का विरोध करते हैं। साल 2022 में पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद रूस और चीन ने ‘नो ल‍िम‍िट’ वाली दोस्‍ती का ऐलान किया था।

रूस की हार पर क्‍यों डर रहा चीन ?

इसके बाद से ही रूस ने चीन के साथ बहुत मजबूत आर्थिक साझेदारी की है। इसकी मदद से ही रूस पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों से पिछले 4 साल में बच निकलने में सफल रहा है। वहीं रूस की इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए चीन मास्‍को से उसकी हथियार तकनीक ले रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को डर सता रहा है कि अगर रूस यूक्रेन में हार जाएगा तो अमेरिका हिंद प्रशांत में उसकी ओर अपनी तोपों का मुंह मोड़ देगा। अमेरिका के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र टॉप प्र‍ियॉरिटी में शामिल है।

रूस और चीन का सैन्‍य व्‍यापार

बर्लिन की दीवार गिरने के बाद साल 1989 से ही रूस और चीन के बीच रक्षा व्‍यापार बढ़ा। अमेरिका और उसके सहयोगी इराक में सद्दाम हुसैन पर फोकस क‍िए हुए थे वहीं, उसी समय मास्‍को ने चीन को सैन्‍य तकनीक बेचना शुरू किया। इसमें सुखोई-27 फाइटर जेट शामिल है। यह बाद में चीन का जे-11 फाइटर जेट बन गया। चीन ने शुरू में रूस से पूरा हथियार स‍िस्‍टम खरीदा लेकिन बाद में उसने केवल जरूरी कलपुर्जे ही लेना शुरू किया। इसमें टर्बोफेन इंजन शामिल है।

भारत को हथियार देने पर भड़का था चीन

इस डील के बाद भी रूस और चीन के बीच अव‍िश्‍वास बना हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रूस था न कि पश्चिमी देश जिसने चीन को अत्‍याधुनिक हथियार बेचने में कुछ ज्‍यादा ही सावधानी बरती। दोनों में दोस्‍ती बढ़ने के बाद भी अव‍िश्‍वास बना हुआ था। चीन ने रूस से इस बात पर आपत्ति जताई थी कि उसने अपने कुछ सर्वश्रेष्‍ठ हथियार भारत को क्‍यों बेचे जो बीजिंग का रणनीतिक दुश्‍मन है। वहीं रूस ने चीन को कोई खुलकर तकनीक का हस्‍तांतरण नहीं किया। चीन ने रूस से एमआई-8 हेलिकॉप्‍टर और एमआई-17 हेलिकॉप्‍टर भी खरीदे थे। रिपोर्ट के मुताबिक चीन रूस से सस्‍ते हथियार खरीदकर उनका कॉपी बना लेता था। इसे ज्‍यादातर चीन जासूसी के जरिए अंजाम देता था।

राजेश मिश्र

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