
सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ (न्यायपालिका में भ्रष्टाचार) नामक अध्याय पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसके वितरण और छपाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की छवि बिगाड़ने की एक “गहरी साजिश” करार दिया है।
न्यायालय के मुख्य निर्देश और कार्रवाई;
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच (जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं) ने निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं। वहीं, केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभागों को आदेश दिया गया है कि वे स्कूलों, दुकानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से इस किताब की सभी कॉपियां तुरंत हटाएं। यदि इसके बाद भी किताब का कोई भी हिस्सा (प्रिंट या डिजिटल) बांटा जाता है, तो उसे कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवमानना माना जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT निदेशक को नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने उन लेखकों के नाम और योग्यता की जानकारी मांगी है जिन्होंने यह चैप्टर तैयार किया था। बता दें कि सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 2 सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद एक विशेष कमेटी मामले की गहराई से जांच करेगी।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी;
CJI ने स्पष्ट किया कि इस मामले को हल्का नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश लगती है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और यह केस तब तक बंद नहीं होगा जब तक सच सामने न आ जाए।”
राजेश मिश्र



