पटना के बेऊर जेल में बंद राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रंगदारी और अवैध जमीन कब्जे के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे रीतलाल को पटना हाई कोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख;
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने रीतलाल यादव की नियमित जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया है। यह आदेश खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 के तहत सुनाया गया। अधिवक्ता अजय मिश्रा ने दलील दी कि रीतलाल का इतिहास दागदार रहा है और उन पर 40 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र नारायण ने जमानत के पक्ष में तर्क दिए, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
प्रमुख आरोप और घटनाक्रम;
यह पूरा मामला एक संगठित अपराध सिंडिकेट चलाने से जुड़ा है। दरअसल,10 अप्रैल को बिल्डर कुमार गौरव ने 50 लाख रुपये की रंगदारी और जान से मारने की धमकी की FIR दर्ज कराई। 11 अप्रैल को पुलिस ने रीतलाल के 11 ठिकानों पर रेड की, जिसमें 10.5 लाख नकद, 77 लाख के ब्लैंक चेक और कई संदिग्ध डिजिटल सबूत (पेन ड्राइव) मिले। कानूनी शिकंजा कसता देख पूर्व विधायक ने 17 अप्रैल 2025 को दानापुर कोर्ट में सरेंडर किया।
अपराध से साम्राज्य तक का सफर;
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, रीतलाल यादव का आपराधिक ग्राफ 1990 के दशक में छोटी चोरियों (साइकिल/मोटरसाइकिल) से शुरू हुआ था। समय के साथ उन्होंने दानापुर इलाके में अपना खौफ पैदा किया। मुस्तफापुर मौजा में 76 डिसमिल जमीन पर अवैध रूप से 16 दुकानें बनवाई थीं, जिसे प्रशासन ने मई 2025 में ढहा दिया। साथ ही, 3 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का भी आरोप है। वहीं, पुलिस का दावा है कि उन्होंने अवैध धन के दम पर युवाओं का एक गिरोह बनाया, जिसका उपयोग जमीन कब्जाने और वसूली के लिए किया जाता था।
अब ED की बारी;
पटना पुलिस ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी है। पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अब रीतलाल की अवैध संपत्तियों की मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से जांच की जाएगी, जो उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा सकती है।
राजेश मिश्र



