नई दिल्ली: नॉर्थ-ईस्ट और ईस्ट दिल्ली में नए सरकारी स्कूल खुलने वाले हैं। सरकार नंद नगरी, मंडोली, न्यू उस्मानपुर, जोहरीपुर और गीता कॉलोनी में खाली जमीन पर पक्की इमारतें बनाने की प्लानिंग कर रही है। यह अतिरिक्त क्षमता नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के लिए बहुत अहम हो सकती है, जहां छात्रों की भीड़ हमेशा से एक समस्या रही है।
जल्द शुरू किया जा सकता है प्रोजेक्ट
सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और संबद्ध कार्यों को मिलाकर पांचों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 165 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। एक अधिकारी ने कहा कि मिट्टी की जांच और संरचनात्मक योजना से लेकर कक्षाओं और विद्युत, जल आपूर्ति और अग्नि-सुरक्षा प्रणालियों को डिजाइन करने की तैयारी का काम जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। सभी पांच स्कूलों को स्टिल्ट सहित चार मंजिल की इमारतों के रूप में योजनाबद्ध किया जा रहा है।
जगह की कमी का करना पड़ रहा सामना
कुछ साल पहले दिल्ली हाई कोर्ट को सौंपे गए शिक्षा निदेशालय (DoE) के डेटा से पता चला था कि कई स्कूलों में स्टूडेंट-क्लासरूम का अनुपात 100 से ज्यादा था। इनमें नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के जौहरीपुर के एक सरकारी स्कूल में प्रति क्लासरूम औसतन 190 छात्र शामिल थे। खजूरी खास और सभापुर जैसे इलाकों के स्कूलों को भी जगह की भारी कमी का सामना करना पड़ा है।
दिल्ली के दूसरे स्कूलों का कम होगा बोझ
इन प्रोजेक्ट्स से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दूसरे स्कूलों पर बोझ कम होगा। 2024 में DoE ने बताया कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिले में 1,32,607 छात्रों के लिए सिर्फ 48 स्कूल थे, जिसका मतलब था कि एक स्कूल में 2,763 छात्र थे। जिन इलाकों में स्कूल बनेंगे, उनमें नंद नगरी में सुंदर नगरी, मंडोली में हर्ष विहार, न्यू उस्मानपुर में दूसरी पुश्ता और गीता कॉलोनी शामिल हैं। जोहरीपुर में दो स्कूल बनाए जाएंगे।
शामिल करने होंगे भूकंप रोधी प्रावधान
पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए कंसल्टेंसी से आवेदन मंगाए हैं। कंसल्टेंट का काम सिर्फ बिल्डिंग का नक्शा बनाने तक ही सीमित नहीं होगा। मिट्टी की जांच और स्ट्रक्चर की प्लानिंग से लेकर क्लासरूम में बिजली, पानी, आग से सुरक्षा और दूसरे सिस्टम की डिज़ाइनिंग तक, एजेंसी प्रोजेक्ट को उस स्टेज तक तैयार करेगी जहां से कंस्ट्रक्शन शुरू हो सके। स्ट्रक्चरल डिजाइन को लेटेस्ट BIS और भूकंप से जुड़े नियमों (seismic codes) का पालन करना होगा और उसमें भूकंप-रोधी प्रावधान भी शामिल करने होंगे।
45 दिन में पूरी हो जाएगी प्रक्रिया
एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी नियुक्त होने के बाद कंसल्टेंसी की प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी हो जाएगी। इसमें मिट्टी की जांच, मॉडल और ड्रॉइंग के साथ स्ट्रक्चरल डिजाइन और मंजूरी लेना शामिल होगा। अधिकारी ने कहा कि कंसल्टेंट सबसे पहले जियोटेक्निकल जांच करेगा और स्ट्रक्चरल डिजाइन, साइट डेवलपमेंट प्लान और कंस्ट्रक्शन की डिटेल्ड ड्रॉइंग तैयार करने से पहले डिटेल्ड डिजाइन-बेसिस रिपोर्ट बनाएगा। यह काम को पूरा करने के लिए जरूरी स्पेसिफिकेशन और इक्विपमेंट की लिस्ट भी तैयार करेगा।