नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत सोमवार को अदालत में मोबाइल फोन लेकर पहुंचे। अदालत में मोबाइल फोन लेकर आना बहुत ही असामान्य घटना है। सीजेआई सूर्यकांत ने खुद भी कहा कि उनके जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है कि उन्हें मोबाइल लेकर कोर्टरूम में आना पड़ा है।
दरअसल, सीजेआई को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल से पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर मोबाइल फोन पर कुछ संदेश प्राप्त हुए थे, जिसे देखने के लिए उन्हें उसे अदालत में लेकर आना पड़ा।
सीजेआई सूर्यकांत बोले- पहली बार मोबाइल लेकर आना पड़ा
जब सीजेआई अपने मोबाइल फोन पर मिले पत्रों को मुस्कुराते हुए पढ़ रहे थे, तो अदालत में मौजूद वकीलों के चेहरों पर भी मुस्कुराहट स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
बंगाल के चीफ सेक्रटरी और डीजीपी को फटकारा था
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला और डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता को 1 अप्रैल को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाने के लिए फटकार जमकर फटकार लगाई थी। दरअसल, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना को लेकर इन अधिकारियों को अर्जेंट कॉल कर रहे थे।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की अदालत ने चीफ सेक्रेट्री से पूछा, ‘आपके साथ क्या दिक्कत है कि आप कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का भी अर्जेंट फोन लगातार करने पर भी नहीं उठाते?’
बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कोर्ट सख्त
- दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी बहुत गंभीर है।
- कलकत्ता हाई कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया चली है और इसी के तहत चुनाव आयोग की सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों की भी मदद ली जा रही है।
- पिछले दिनों जब पश्चिम बंगाल के मालदा में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने घंटों बंधक बना लिया, उसके बाद सीजेआई ने राज्य प्रशासन के खिलाफ बहुत ही कड़ा रुख अपनाया।
- सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाए रखने की घटना को ‘लॉ एंड ऑर्डर ब्रेकडाउन’ का मामला बताया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायिक अधिकारियों के मनोबल को गिराने और उन्हें ड्यूटी से रोकने का ‘सोच-समझकर किया गया और सुनियोजित’ कोशिश बताया है।
- अदालत ने इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसी से करवाने का निर्देश दिया, जिसके बाद एनआईए ने जांच शुरू की और मास्टरमाइंड समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी मुमकिन हुई।
बंगाल में एसआईआर के बाद 91 लाख वोटरों के नाम कटे
- पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल, 2026 को दो चरणों में मतदान है।
- बंगाल में 155 दिनों के बाद अब वोटर लिस्ट की एसआईआर प्रक्रिया बंद कर दी गई है।
- कुल मिलाकर प्रदेश में एसआईआर के बाद 90.8 लाख वोटरों को नाम काट दिए गए हैं।
- एसआईआर से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.6 करोड़ थी, जिनमें से अब लगभग 12% बाहर हो गए हैं।
राजेश मिश्र



