Thursday, April 9, 2026
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‘भारत हर साल बना सकता है 300 प्लूटोनियम परमाणु बम’, न्यूक्लियर रिएक्टर की सफलता पर टेंशन में पाकिस्तान

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। इसपर पूरी दुनिया से भारत को बधाई संदेश मिले हैं। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में डर देखा जा रहा है। जाहिर काजमी, जो पाकिस्तान के आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर हैं और स्ट्रैटजिक प्लान डिविजन के सदस्य हैं उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत इस क्षमता को हासिल करने के बाद तेजी से प्लूटोनियम परमाणु बमों का निर्माण कर सकता है।

जाहिर काजमी ने आरोप लगाया है ‘भारत का बिना सुरक्षा वाला परमाणु कार्यक्रम, जिसमें नया और बेहद अहम PFBR और आठ PHWR शामिल हैं वो उसके परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को काफी बढ़ा देता है।’ उन्होंने आरोप लगाया है ‘भारत का नया ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर‘ (PFBR) हथियारों के ग्रेड वाले प्लूटोनियम के उत्पादन को बहुत ज्यादा बढ़ा देगा। और भविष्य में भारत की क्षमता हर साल 300 परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हो जाएगी।’

भारत के PFBR कार्यक्रम से पाकिस्तान चिंतित

जाहिर काजमी ने इसके अलावा यूरोपीय देशों को भी भारत के परमाणु कार्यक्रम का डर दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा है ‘लगभग 480–2600 परमाणु हथियारों के अनुमानित जखीरे, सैकड़ों किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम, कई टन HEU और दोहरी क्षमता वाली मिसाइलों के बढ़ते जखीरे (जिनमें अग्नि-V और आने वाली अग्नि-VI शामिल हैं और जिनकी मारक क्षमता 8,000 किलोमीटर से ज्यादा है और जो यूरोप के अंदरूनी हिस्सों और उससे भी आगे तक निशाना साध सकती हैं) के साथ मिलकर भारत दुनिया में अस्थिरता पैदा करने वाला एक बड़ा कारक बन गया है।’

उन्होंने आगे आरोप लगाया है कि ‘2008 की NSG छूट और तथाकथित नागरिक-सैन्य अलगाव योजना ने असल में उस जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया।’ जाहिर काजमी ने आरोप लगाते हुए आगे लिखा है ‘उन्होंने जिस फ्रेंकस्टीन के राक्षस को बनाने में मदद की है वह अब और भी बड़ा होता जा रहा है। और अब बस कुछ ही समय की बात है जब उस फैसले के नतीजों को नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाएगा।’

भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमता का सबसे ज्यादा डर

जाहिर काजमी के सोशल मीडिया पोस्ट में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमता का सबसे ज्यादा डर दिखा है। उन्होंने लिखा है ‘भारत की नौसैनिक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता ही असली गेम-चेंजर है। परमाणु-शक्ति से चलने वाली और परमाणु-हथियारों से लैस अरिहंत-क्लास SSBNs का इसका बढ़ता बेड़ा जिसमें K-4 SLBM (3,500 km रेंज) से लैस INS अरिघात भी शामिल है, समुद्र-आधारित हमले का एक ऐसा सुरक्षित विकल्प देता है जिसकी पहुंच हिंद महासागर क्षेत्र से भी कहीं आगे तक है।’

पाकिस्तान के मंसूर अहमद ने जब उनके पोस्ट पर लिखा कि ‘500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के चालू होने से भारत का सालाना वेपन्स-ग्रेड प्लूटोनियम उत्पादन मौजूदा 24-26 किलोग्राम से बढ़कर 170 किलोग्राम हो जाएगा। जब यह पूरा हो जाएगा तो पांच अतिरिक्त FBRs इस क्षमता को बढ़ाकर 921 किलोग्राम WG Pu तक पहुंचा देंगे जो प्रति वर्ष 300 वॉरहेड्स के लिए पर्याप्त होगा।’

‘भारत के परमाणु कार्यक्रम से दुनिया को होनी चाहिए चिंता’

उसपर उन्होंने आगे लिखा है ‘दुनिया को भारत द्वारा पैदा किए जा रहे इस बढ़ते खतरे के बारे में चिंतित होना चाहिए। पाकिस्तान जानता है कि इन हथियारों का क्या करना है। हम इनसे डरते नहीं हैं। चर्चिल के शब्दों को उधार लेते हुए कहें तो इससे बस मलबा ही उछलेगा।’

जाहिर काजमी ने भारत के सिविल न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर एक डर दिखाने की कोशिश की है जबकि दुनिया के कई परमाणु इंजीनियरों ने भारत की उपलब्धि को सराहा है। इसके जरिए जाहिर काजमी ने दिखाने की कोशिश की है कि भारत का परमाणु कार्यक्रम दुनिया के लिए खतरा है। जबकि खुद इंटरनेशनल एजेंसियों की रिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताया गया है।

राजेश मिश्र

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