भोपाल – मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा शामिल हुए। पदयात्रा को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद निर्वाचन आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए वह चुनाव आयोग को निशाना बना रही है। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को ईवीएम और बैलेट पेपर की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी की स्थिति पर आत्मचिंतन करने की सलाह भी दी।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष की ओर से जिस तरह का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया जा रहा है, उससे देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है और यहां के नागरिकों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में गहरी आस्था है।
नड्डा के मुताबिक, भारतीय निर्वाचन आयोग ने वर्षों की मेहनत से दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है, लेकिन कांग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए इस संस्था की साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी समर्थन नहीं मिलने के कारण विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस को अगले 20-30 साल तक मौका नहीं मिलने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी के नेता भी समझ चुके हैं कि आने वाले 20 से 30 वर्षों तक जनता उन्हें सत्ता में आने का अवसर नहीं देने वाली है। इसी वजह से चुनाव में हार मिलने पर निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तो निर्वाचन आयोग की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन हारने के बाद उसी आयोग को निशाने पर ले लेती है। उन्होंने इसे विपक्ष की दोहरी मानसिकता बताया। जेपी नड्डा ने भारत की चुनाव प्रक्रिया की विशेषता बताते हुए कहा कि कई देशों में मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए खुद निर्वाचन आयोग के कार्यालय जाना पड़ता है, जबकि भारत में बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का पंजीकरण करते हैं।
आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस पर साधा निशाना
अपने भाषण में जेपी नड्डा ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस किस आधार पर आज लोकतंत्र की रक्षा करने की बात कर रही है, जबकि उसके शासनकाल में आपातकाल के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को जेल में बंद किया गया था। नड्डा ने दावा किया कि आपातकाल के समय करीब 1 लाख 30 हजार लोगों को मीसा और डीआईआर के तहत लगभग 22 महीने तक हिरासत में रखा गया था। उन्होंने खुद को आपातकाल का भुक्तभोगी बताते हुए कहा कि उस दौरान पुलिस उन्हें दो बार कक्षा से उठाकर ले गई थी और उनके परिवार के सदस्यों को भी जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन को करीब से देखा है।
EVM और बैलेट पेपर पर राहुल गांधी को दी सलाह
केंद्रीय मंत्री ने ईवीएम को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को हैक करके दिखाने की चुनौती दी थी, लेकिन आरोप लगाने वाले लोग सामने नहीं आए। नड्डा ने हाल ही में हुए 28 एमएलसी चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली, महाराष्ट्र में अन्य दलों के समर्थन से एक सीट हासिल हुई, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद चार में से एक भी सीट पार्टी को नहीं मिली। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें ईवीएम और बैलेट पेपर की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी की स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए। नड्डा ने कहा कि केवल आरोप लगाने से राजनीति में सफलता नहीं मिलती, बल्कि जनता के बीच अपनी जगह बनानी पड़ती है।
SIR को बताया पुरानी और नियमित प्रक्रिया
जेपी नड्डा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उनके अनुसार, देश में अब तक यह प्रक्रिया 12 बार हो चुकी है। इनमें से 10 बार कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में और दो बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों के समय यह काम हुआ है। उन्होंने एक बार अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का उल्लेख किया।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मौजूदा पुनरीक्षण अभियान में करीब 10 लाख 24 हजार बूथ लेवल अधिकारियों को लगाया गया और लगभग 96 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता सूची से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं।
जनता का विश्वास जीतने पर दिया जोर
अपने संबोधन के अंत में नड्डा ने कहा कि राजनीति में लंबे समय तक बने रहने के लिए जनता के दिलों में जगह बनाना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि चुनावी हार के लिए निर्वाचन आयोग और ईवीएम को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी राजनीतिक कमियों को समझे। भोपाल की इस पदयात्रा के माध्यम से भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदाता सूची पुनरीक्षण के समर्थन में अपनी बात रखी।