
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। इस चुनावी रणभूमि में अपनी स्थिति मजबूत करने और रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। सोमवार, 2 मार्च को होने वाली इस बैठक में पार्टी के सभी 19 विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे, जिसमें भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
मां रीना पासवान की उम्मीदवारी पर विराम
पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि चिराग पासवान की मां, रीना पासवान को एनडीए (NDA) की ओर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। हालांकि, चिराग पासवान ने रविवार को मीडिया से बातचीत में इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मां सक्रिय राजनीति में आने की इच्छुक नहीं हैं और न ही पार्टी की ओर से ऐसी कोई दावेदारी पेश की गई है।
विधायकों के अनुभव और राज्यसभा की रणनीति
चिराग पासवान के अनुसार, यह बैठक केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा के बजट सत्र में लोजपा (आर) के कई विधायक पहली बार सदन का हिस्सा बने थे। चिराग ने कहा, “हमारे अधिकांश विधायक युवा हैं और पहली बार अपनी बात सदन में रख रहे थे। उनके अनुभवों को साझा करना और भविष्य के लिए उन्हें तैयार करना इस बैठक का मुख्य उद्देश्य है।” हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असली चर्चा 5 मार्च को होने वाले नामांकन की समय सीमा और एनडीए के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर होगी।
क्या होगा सीटों का समीकरण?
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी गणित काफी दिलचस्प मोड़ पर है, जहां वर्तमान संख्याबल के अनुसार 3 सीटें एनडीए और 2 सीटें महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही हैं। हालांकि, मुख्य पेच यह है कि एनडीए चौथी सीट के लिए भी प्रयास कर सकता है, जिसके लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से आरजेडी द्वारा एक सीट पर प्रत्याशी की घोषणा किए जाने के बाद ‘क्रॉस वोटिंग’ की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में 19 विधायकों के साथ चिराग पासवान की भूमिका इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ के रूप में उभर सकती है, जिसे देखते हुए गठबंधन के भीतर अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और विधायकों को एकजुट रखने के लिए उनके द्वारा बुलाई गई यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
राजेश मिश्र



