
बिहार में बहुप्रतीक्षित Bakhtiyarpur–Tajpur Ganga Bridge परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने 5.5 किलोमीटर लंबे इस गंगा पुल के निर्माण की समय-सीमा तय कर दी है। लक्ष्य के अनुसार जून 2027 तक पुल-सह-पहुंच पथ का निर्माण कार्य पूरा कर यातायात शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच आवागमन को सुगम बनाना तथा पटना के प्रमुख पुलों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना है।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की द्वितीय पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति 3923 करोड़ रुपये की है। पुल के साथ-साथ दोनों ओर कुल 45.74 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसमें समस्तीपुर जिले के ताजपुर की ओर 41.25 किमी तथा पटना जिले के बख्तियारपुर की ओर 4.50 किमी सड़क बनाई जाएगी। समस्तीपुर अंतर्गत चक लालशाही से ताजपुर खंड की 16.2 किमी सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य तेजी से प्रगति पर है।
यह पुल एनएच-31 (करजान, बख्तियारपुर) को एनएच-28 (ताजपुर, समस्तीपुर) से जोड़ेगा। इसके चालू होने से Mahatma Gandhi Setu और Rajendra Setu पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है, जिससे जाम की समस्या में राहत मिलेगी।
परियोजना जन-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत क्रियान्वित की जा रही है। इसके पूरा होने पर समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्णिया जैसे उत्तर बिहार के जिले सीधे पटना, गया, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, जहानाबाद और नालंदा से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे। साथ ही झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। नेपाल सीमा के नजदीकी इलाकों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित होगा, जिससे व्यापार और कृषि उत्पादों के आवागमन को नई दिशा मिलेगी।
सरकारी अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य द्रुत गति से चल रहा है और तय समय-सीमा के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य है। इस पुल के चालू होने से बिहार की परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
राजेश मिश्र



